की होया जे जन्म मिला
की होया जे जन्म मिला पर
कदर जन्म दा पाया न,
परमेश्वर दी भक्ति वाला
उस पर रंग चढ़ाया न।
की होया………..
फिरें भटकता दर-दर बन्दे,
खोज अन्दर दी कीती न,
प्रीतम तेरे अन्दर बसदा,
तैनू नज़री आया न।
की होया………….
पापा वाली मैल चढ़ाके,
मन मैला तू कीता है,
यम नियम दा पालन करके,
इननू शुद्ध बनाया न।
की होया…………..
मानुष जन्म अमोलख हीरा,
मिट्टी विच मिलाया है,
परोपकार ते भक्ति करके,
कुछ भी लाभ उठाया न।
की होया…………….
बुरे कम्मां विच उमर गुजारी,
नेक काम कोई कीता न,
दीन दुःखी दी सेवा करके,
कुछ भी धर्म कमाया न।
की होया…………..
बिना दाग सी चोला तेरा,
दागों दाग लगाया है,
ज्ञान दा साबुन कदीं लगा के,
इक बी दाग मिटाया न।
की होया……………
भले जना दा संग न कीता,
वेद ज्ञान नू सुनया न,
मूर्ख ने बेअकली कीती,
शरण प्रभु दी आया न।
की होया……………
महापुरुष संसार में उन्हें कहा जाता है, जो लोकहित की भावना से प्रेरित होकर असहाय का सहाय और निरुपाय का उपाय बनकर परोपकार के क्षेत्र में अध्याय की सृष्टि करते हैं। – आचार्य चन्द्रशेखर
ध्येय पाने को स्वयं पैर बढ़ाना होगा,
पथ के पत्थर को स्वयं दूर हटाना होगा।
खुदा के नाम को बदनाम करने वालों,
खुदा को पाने के लिए, खुदी को मिटाना होगा ।।










