ख्याल बच्चों का करले

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ख्याल बच्चों का करले

तर्ज – हाल क्या है दिलों का……

(पत्नी शराबी पति से कहती है-)

ख्याल बच्चों का करले,
ओ मेरे पिया, जाम पर जाम
निसदिन लगाते हो क्यों।
मय के शौकीन मिलने,
जो आते तुम्हें, अपने घर में
उन्हें तुम, बिठाते हो क्यों।।

ज़िन्दगानी को अपनी
नया मोड़ दो कह रहा था
“सचिन” भी इसे छोड़ दो
बोतलों से ये नाता अभी तोड़ दो
दूसरों को ये नाटक दिखाते हो
क्यों ख़्याल बच्चों का………

उम्र भर विष के प्यालों को
पीते रहे बोतलों के सहारे ही
जीते रहे रोज़ इस घर में
होते फ़जीते रहे अब बतादो
मुझे तुम सताते हो क्यों
ख़्याल बच्चों का……

गालियाँ लोग देते तुम्हें
रात दिन मय के प्यालों से
फिर भी ना करते हो घिन
एक दिन भी ना रह पाते
मदिरा के बिन घर में पी-पी
के प्यालों को आते हो क्यों ख्याल
बच्चों का……

बड़ी जल्दी चिता में तू सो जायेगा
जल्द ही नाश इस घर का हो जायेगा
तेरे कर्जे में घर भी ये खो जायेगा
धार में अपनी नैंया डुबाते हो
क्यों ख़्याल बच्चों का…….