कौन सी वो जगह तुम नहीं हो जहाँ
तुम जहाँ हो नहीं कोई तुमसा वहाँ ॥ तुम जहाँ हो !!
ज्वार सागर में धार सरिताओं में है
सूर्य किरणों से प्राण धराओं में है
चाँद की उजले जल में हैं परछाईयाँ ॥ तुम जहाँ हो !!
तेरी धाक दसों ही दिशाओं में है
इन फिजाओं में है और हवाओं में है
कैसा बाँधा है सृष्टि का सुन्दर समाँ ॥ तुम जहाँ हो !!
हम तो पलते प्रभु तेरे सायों में हैं
तेरा प्रेम सदा मन के भावों में है
प्रीत के हर कदम पे है तेरा निशा ॥ तुम जहाँ हो !!
बहता जीवन नदी सा बहावों में है
मेरा हर कर्म तेरी निगाहों में है
नहीं मुक्ति प्रभु मेरी तेरे विना ॥ तुम जहाँ हो ॥










