कौन है वो शक्तिमान बल तेज धारी

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कौन है वो शक्तिमान बल तेज धारी

कौन है वो शक्तिमान्
बल तेज धारी
किसने बनाई सृष्टि
अद्भुत न्यारी

मन का भी मन है वो
प्राण का भी प्राण है
मन प्राण इन्द्रिय का वो
कारण प्रधान है
जिसकी शक्ति से ही चलती
है ये सृष्टि सारी
उसी ने तो की है अनुपम
ऐसी चित्रकारी

कैसा है वो सृष्टि कर्ता
जग खेल जिसका
देखने में कैसा है वो
पता क्या है उसका
श्रोत्र के बिना वो सुनता
चक्षु बिन देखता
हाथ बिन सृष्टि करता
बिन पैर चलता
कण कण में रमा हो
रूप नहीं जिसका
सब के हृदय में बैठा
पता है ये उसका

कैसे पाया जाता उसको
कैसे मानते हैं
कैसे देखा जाता उसको
कैसे जानते हैं
न वो आँखों से है दिखता
न वो सुना जाता
मन भी न पहुँचे उस तक
न वो कहा जाता
विश्वमय अभी वही
और वही विश्वजीत है
अनादि अनन्त वही
हर काल से अतीत है

कैसा है स्वभाव उसका
कार्य कैसे करता
कैसे करता है चिन्तन
कहाँ पे वो रहता
परम दयालु है वो
सर्वशक्ति मान् है
सारी सृष्टि में तो वो ही
प्रभु विद्यमान है
मूढ़ उसको दूर समझे
ज्ञानी के समीप है
सर्व व्यापी ब्रह्म तत्त्व
वाणी से अतीत है