करने वेद का प्रचार
तर्ज – सुन के तेरी पुकार………
करने वेद का प्रचार,
संग चलने को तेरे कोई
हुआ ना तैयार, छोड़ घर
द्वार चल दिया वो,
अकेला चल दिया वो
अकेला चल दिया वो,
ऋर्षिवर चल दिया वो हो…. करने…….
बचपन में हुआ घर से बेघर,
वापस फिर ना घर आया
दिल में लगी जो आग वो बुझ गयी
सच्चा शिव उसने पाया,
किया पाप का संहार-2
हम सबके ऋषि ने किये
सपने साकार छोड़ घर द्वार,
चल दिया वो…. अकेला
उसने लिया संकल्प सभी के,
दुःख और दर्द मिटाने का जहर पिया रे
उस योगी ने ना पाया प्यार ज़माने का,
वो था ज्ञान का भण्डार-2
जिनका कोई नहीं था,
उनका ले कांधों पे भार छोड़ घर द्वार,
चल दिया वो……
सूरज चन्दा तारे बादल,
चमकेंगे जब तक सारे गीत
सचिन “सारंग” गूँजेंगे,
ऋर्षिवर के प्यारे-प्यारे,
मिल गायें नर नार-2
उसे मिली है सफलता,
नहीं पायी कभी हार छोड़ घर द्वार,
चल दिया वो……










