कर्मशील इनसान कर ओम् नाम का जाप।

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कर ओम् नाम का जाप


(तर्ज- बुरा जो देखन मैं चला)

१. कर्मशील इनसान कर ओम् नाम का जाप।
ओम् नाम के जाप से मिटें सकल संताप ।
रे प्राणी……….

२. वेद शास्त्र सद्ग्रन्थ भी ऋषि मुनि गुरु और सन्त।
एक साथ मिलकर कहें उसके नाम अनन्त ।
रे प्राणी……….

३. ओम् नाम सबसे बड़ा प्रभु का असली नाम ।
बाकी जितने नाम हैं गुणवाचक हैं तमाम ।
रे प्राणी……….

४. जन जन के व्यवहार में है जिसका उल्लेख ।
औषधियों की औषधि ओम् रसायन देख ।
रे प्राणी………

५. हो जाये इनसान की परमेश्वर से प्रीत।
सुखदाई बनकर बजे जीवन का संगीत ।
रे प्राणी……….

६. जो कुछ भी है दीखता बना हुआ संसार ।
एक मात्र परमात्मा है सबका आधार।
रे प्राणी……….

७. ईश्वर ही संसार में सबका मूलाधार।
जीवन भर करते रहो जगत् पिता से प्यार।
रे प्राणी..

८. सबसे वह नज़दीक है वही दूर से दूर।
अपने भक्तों को करे ख़ुशियों से भरपूर ।
रे प्राणी……

९. कण कण में व्यापक प्रभु अन्दर बाहर एक ।
उसकी शक्ति से चलें सूरज चाँद अनेक ।
रे प्राणी……….

१०. मुश्किल राहों में अगर रहे प्रभु का ध्यान।
‘पथिक’ तुम्हारी मंज़िलें हो जायें आसान।
रे प्राणी……….