शिक्षा
कर्मों की खेती बन्दे,
खुद ही तू काटेगा।
सुख-दुःख तेरे कोई,
और नहीं बांटेगा।।
बचपन खोया तून,
खेल और कूद में।
मस्त जवानी बीती,
वो भी तेरी भूल में।
समय यूँ गंवा ना देना,
अपने बुढ़ापे का।।
सुख-दुःख तेरे कोई
और नहीं बाँटेगा।।
कर-कर काम खोटे,
नाम कमा लिया।
पापों वाली गठरी का,
बोझा बढ़ा लिया।
जो भी काम किया तूने,
वो भी सब घाटे का।।
सुख-दुःख तेरे कोई,
और नहीं बाँटेगा।।
एक दिन बन्दे,
जब तू जाएगा जहान से।
दूर खड़े होंगे वो जो,
चाहते हैं जान से।
होगा हिसाब तेरे,
सारे कर्म खाते का।।
सुख-दुःख तेरे कोई
और नहीं बाँटेगा।।
करना है क्या तुझको,
मानव विचार कर।
पाना है प्रभु को तो,
सबसे तू प्यार कर।
जितने भी दिन तू,
दुनियां में काटेगा।।
सुख-दुःख तेरे कोई
और नहीं बाँटेगा।।










