कर्म बंधन छुड़ाने से, छुड़ाये जा नहीं सकते
कर्म बंधन छुड़ाने से,
छुड़ाये जा नहीं सकते
यह वो अक्षर हैं जो अक्षर,
मिटाये नहीं जा सकते।
जो कहते हैं पकड़ कर हाथ,
तुमको पार कर देंगे।
वचन कहनें यह संभव हैं,
निभाये जा नहीं सकते ।।
कर्म बंधन छुड़ाने से छुड़ाये……
करो गुरुओं की तुम सेवा,
मगर यह मान लो दिल से।
कि गुरुवर की सिफारिश से,
छुड़ाये जा नहीं सकते ।।
कर्म बंधन छुड़ाने से छुड़ाये……
किये कर्मों का सब खाता,
प्रभु के पास रहता है।
छुपाओ लाख तुम उससे,
छुपाये जा नहीं सकते।।
कर्म बंधन छुड़ाने से छुड़ाये…….
करो तुम तीर्थों पर स्नान,
मन के मैल धोने को।
मगर सज्ञान के बिन,
मिटाये जा नहीं सकते।।
कर्म बंधन छुड़ाने से छुड़ाये……
जो कर्मों से उठे ऊँचे,
उन्हें संसार झुकता है,
गिराने से किसी के वह,
गिराये जा नहीं सकते ।।
कर्म बंधन छुड़ाने से छुड़ाये……
कर्म करते हैं पीछा ‘हंस’,
ऋषियों का यह कहना है,
बुरे पाते हैं दुःख, सज्जन
सताये जा नहीं सकते।।
कर्म बंधन छुड़ाने से छुड़ाये……..










