करजा तू भला कुछ दुनियाँ का

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करजा तू भला कुछ दुनियाँ का

करजा तू भला कुछ दुनियाँ का,
मत हीरा जन्म गँवा प्यारे
हर दिल में तेरी याद रहे,
कोई ऐसा कर्म कमा प्यारे।

जब तक तन में जान रहे
तुझे सेवा का ही ध्यान रहे

हो निन्दा या तारीफ तेरी,
उस ओर न कान लगा प्यारे।
करजा तू भला कुछ दुनियाँ का,
मत हीरा जन्म गँवा प्यारे।।1।

तुम्हें वीर माता ने जाया है
नहीं ध्यान कभी तुम्हें आया है

इक चमक निराली पैदा कर,
दे दुनियाँ को चमका प्यारे
करजा तू भला कुछ दुनियाँ का,
मत हीरा जन्म गँवा प्यारे।।2।।

ऋषि दयानंद एक अकेला था।
बस ईश्वर एक सहेला था
बनकर मर्द मैदाँ निकले,
दिया सब अन्धकार मिटा प्यारे।
करजा तू भला कुछ दुनियाँ का,
मत होरा जन्म गँवा प्यारे।।3।

ये देख अब कहाँ अंधेरा है?
हुआ साफ ये रास्ता मेरा है

सब काँटे स्वामी ने दूर किये,
अब तो हिम्मत दिखला प्यारे
करजा तू भला कुछ दुनियाँ का,
मत होरा जन्म गँवा प्यारे।।4।