कर मुश्किल आसान

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ग़रीबों की पुकार

(तर्ज-जान सके तो जान)

कर मुश्किल आसान।
सूख रही है जीवन खेती
देख जरा भगवान् ।
कर मुश्किल आसान…..

१. ऐ विधाता जग में तूने क्यों गरीब बनाए।
फाके जिनकी किस्मत में हैं ज़ालिम भूख सताए।
कदम कदम पर गिरते हैं ये रोक भी ले तूफान।
कर मुश्किल आसान………..

२. रोटी देना गर मुश्किल था क्यों यह पेट लगाया।
तेल नहीं था घर में तेरे क्यों फिर दीप जलाया।
भूख के मारे तड़प तड़प कर छूट न जाएँ प्राण।
कर मुश्किल आसान………..

३. न कोई साथी न कोई अपना किस को हाल सुनाएँ।
कहीं न कोई ठौर ठिकाना किस के दर पर जाएँ।
तन मन सब नाकाम हुए हैं जैसे हों बेजान।
कर मुश्किल आसान………..

४. दुनियाँ तेरा बाग़ बगीचा तू है इस का माली।
पानी दे तू हर पौधे को फिर ये रहे क्यों ख़ाली।
‘पथिक’ तुम्हारी दुनियाँ में हैं दो दिन के मेहमान।
कर मुश्किल आसान………..