कर जोड़ कहूं श्री मात सुनो
कर जोड़ कहूं श्री मात सुनो,
मुझे राज पिताजी ने वन का दिया।
करें राज अवध का भ्राता भरत,
मैंने उस को ही स्वीकार किया।।
करूं चौदह बरस तप वन में रहूं,
वहां धूप और शीत सभी मैं सहूं।
मत सोच करो श्री मात कहूं,
तभी होय सुफल मेरा जन्म लिया।।
ऋषि सेवा करूं मही भार हरूं,
और आज्ञा पिताजी की सीस धरूं।
फिर आके दर्शन तुम्हारे करूं,
तूने मात कैकई खूब किया।
मत शोक करो मन धैर्य धरो, मु
झे आज्ञा दो वन जाने की।
जहां जप मैं करूं और दुष्ट दलूं,
यही आज्ञा मुझे वेदों ने दिया।।










