भक्ति
कर ईश्वर से प्यार, मानव कर ईश्वर से प्यार।
संकट मोचन विघ्न विनाशक, सुखदायक दातार ।।
मानव ! कर ईश्वर से प्यार …….।।1।।
जिस जगदीश्वर से उपजा है,
यह अद्भुत संसार।
जो कण-कण में रमा हुआ है, जड़ चेतन आधार।
मानव ! कर ईश्वर से प्यार……..।।2।।
तू अशक्त और नाव पुरानी, आन फंसी मंझधार।
खेवट एक वही भव सागर, पार उतारनहार।
मानव ! कर ईश्वर से प्यार ……..।।3।।
सदा किया कर प्यार परस्पर, पर हित पर उपकार।
धर्म धुरन्धर धन धरणीधर, दया धर्म उर धार।।
मानव ! कर ईश्वर से प्यार……..।।4।।
तज कूपन्थ चल सरल सुपथ पर, तज कुवचन कुविचार।
‘पथिक’ समझ सब जीव स्वयं सम, कर सुमधुर व्यवहार ।।
मानव ! कर ईश्वर से प्यार……..।।5।।
ईश्वर को खोजने से वह प्राप्त नहीं होता,
बल्कि उसमें खो जाने से प्राप्त होता है।










