ऐसे इस संसार से जीतो
काम बली जीतो संयम से
क्रोध को दया विचार से जीतो,
कड़वे को कड़वे न बोलो
जहर के बदले अमृत घोलो।
बद जबान मगरूर को अपनी
मधुर मधुर गुफ्तार से जीतो,
जीतो जुल्म सहन शक्ति से
बदी हारती है नेकी से।
लोभ के सिर संतोष हथौड़ा
मोह त्याग तलबार से जीतो,
शर्म-शर्म इन्सान का विरसा
बदियें सब शैतान का विरसा।
नम्रता से अहंकार तोड़ दो,
नफरत को तुम प्यार से जीतो,










