कैसे उतरे पार, नाव अगर प्रभु न तारे
कैसे उतरे पार,
नाव अगर प्रभु न तारे,
भँवरे है मँझधार,
तेरे बिन कौन उबारे
कैसे उतरे पार
सागर दुर्गम-गहरा पानी,
माँझी मूरख-नाव पुरानी
तू ही तारे तो तारे नाव अब
राह अजानी
कैसे उतरे पार
नाव अगर प्रभु न तारे,
कैसे उतरे पार
भक्ति न भावे, ज्ञान न आवे,
कौन यहाँ जो, पथ दर्शाये
जीवन मेरा – तेरे सहारे,
हाथ बढ़ा रे,
कैसे उतरे पार,
नाव अगर यदि प्रभु न तारे
भँवरे है मँझधार,
तेरे बिन कौन उबारे
कैसे उतरे पार










