कैसी जड़े फाड़ कर रख दी
कैसी जड़े फाड़ कर रख दी
मेरे देश की हो भारत देश की
बिना खिवैया भंवर में
नैया फंसी डूबने चली,
फल फुल्लित हो कैसे
बेदर्दी से मसल कर कली।
फुलवारी उजाड़ कर रख दी
मेरे देश की ।।1।।
संयम सदाचार पर जीवन
की पद्धति थमी थी,
वैदिक संस्कृति की
जो कभी विश्व मे धाक जमी थी,
आज सारी उखाड़ कर रख दी
मेरे देश की।।2।।
रहते थे नर नार एक
परिवार बना कर सारे,
जाति प्रान्त मतो फिकरो में
फांट दिये सब न्यारे,
कैसी हुलिया बिगाड़
कर रख दी मेरे देश की।।3।।
शोभाराम प्रेमी पिट गई
भद हद हो गई बदी की,
इक्कीसवी सदी लाने
वालो ने बीसवीं सदी की,
आज अर्थी लिकाड़
कर रख दी मेरे देश की।।4।।










