कैसा सुन्दर जगत रचाया है तूने भगवान।
कैसा सुन्दर जगत रचाया है तूने भगवान।
करते हैं तेरा गुणगान, करते हैं तेरा गुणगान ।।
पृथ्वी, सूरज, चाँद, सितारे,
पर्वत और आसमान ।
करते हैं तेरा गुणगान,
करते हैं तेरा गुणगान ।।
सेब, अंगूर, अनार बनाए,
रंग-बिरंगे फूल खिलाए।
छम-छम, छम-छम वर्षा आए,
कोयल मीठे राग सुनाए।
ऋषि-मुनि और योगी सारे,
धरते तेरा ध्यान ।।
करते हैं तेरा गुणगान – 2…….
मानव चोला अजब बनाया,
सूई न धागा हाथ लगाया।
नस नाड़ी का जाल बिछाया,
आत्मा को इसमें बिठलाया।
द्वार बनाए तूने इसके,
आँख-नाक और कान।।
करते हैं तेरा गुणगान – 2………
द्वार तेरे पर जो भी आऐ,
जीवन अपना सफल बनाए
पर उपकार वो करता,
‘नन्दलाल’ वो न घबराए।
तन मन धन वह देश पर,
कर देते कुर्बान ।।
करते हैं तेरा गुणगान – 2……..










