कहते रहे हम सुनते रहे तुम।

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कहते रहे हम सुनते रहे तुम। (धुन-ये दिल और उनकी निगाहों के साये)

कहते रहे हम सुनते रहे तुम।
सुनने व कहने के दिन जा चुके हैं।

अपनी बुराई अपने ही कानों सुन करके
सहने के दिन जा चुके हैं।। टेक ।।

बहुत कौमी नगमें सुनाये गये हैं।
हंसाये गये हैं रुलाये गये हैं।।

करना कराना कुछ भी हुआ ना।
आलस्य में रहने के दिन जा चुके हैं। 1 ।।

तर्को व युक्तियों की झड़ियें लगाई।
बहसों मुबाहंसों में भी विजय पाई ।।

हथेली बजाकर मधुर भाषणों के ।
बहावो में बहने के दिन जा चुके हैं।।2।।

धरती पै रहना सीखो सिखाओं ।।
यही स्वर्ग की जग को झलकी दिखाओं ।।

जीने दो जीओ समय कह रहा है।
प्रेमी वह दहने के दिन आ चुके हैं।।3।।