काहे को तूने प्रभु नाम न गाया।
(तर्ज- पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई)
काहे को तूने प्रभु नाम न गाया।
सुन भन मेरे शाम सवेरे
वक्त बड़ा अनमोल गँवाया।
काहे को तूने प्रभु नाम…..
१. नर तन जीवन कंचन काया।
परम पिता ने तेरा घर है बनाया।
पर तूने ख़ुद ही न फ़र्ज़ निभाया।
काहे को तूने प्रभु नाम…..
२. जन धरती धन माल ख़ज़ाना।
काम न आया यह बेदर्द ज़माना।
जिस पर सब निज धर्म भुलाया।
काहे को तूने प्रभु नाम…..
३. वह परमेश्वर प्रियतम प्यारा।
अन्त समय भी देगा तुझको सहारा।
अब तक हर सुख जिसने दिखाया।
काहे को तूने प्रभु नाम…..
४. मन पगले शुभ कर्म कमा ले।
तप साधना में घड़ी भर तो लगा ले।
पग पग पर तुझे ‘पथिक’ चेताया।
काहे को तूने प्रभु नाम…….










