कहाँ है मेरे वो साँवरिया
तर्ज – शास्त्रीय संगीत……
कहाँ है मेरे वो साँवरिया,
व्याकुल है देखन को नैना।
दे दो कोई खबरिया ।। कहाँ…….
कोई उनसे मुझे मिला दे,
पिया मिलन की प्यास बुझा दे
जीवन कैसे ‘सचिन’ बिताऊँ,
काली छायी बदरिया कहाँ हैं मेरे……
दिन व रात मेरा मन रोया,
रो-रो के मैंने तन खोया करने
दर्शन मैं प्रीतम के,
ओढ़ के जाऊँ चुनरिया कहाँ हैं मेरे……
मेरे जीवन मे है अंधेरा,
न जाने कब होगा सवेरा
बैंया डार मिलूँगी मैं तो,
जब आयेंगे नगरिया कहाँ हैं मेरे….
मैं बैठी हूँ पलकें बिछाये,
न जाने वो कहाँ से आये
पी के बिन तो है ये सूमी,
मेरी बालि उमरिया कहाँ हैं मेरे……










