शिक्षा
ज्योति से ज्योति जलाते चलो
प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आये जो दीन-दुःखी
सबको गले से लगाते चलो
।। अन्तरा ।।
जिसका न कोई संगी न साथी,
ईश्वर है रखवाला।
जो निर्धन है जो निर्गुण है,
वो है प्रभु का प्यारा।
प्यार के मोती लुटाते चलो …..
ज्योति से ज्योति …….
आशा टूटी ममता रूठी,
छूट गया है किनारा
बन्द करो मत द्वार दया का,
दे दो कुछ तो सहारा
दीप दया के जलाते चलो….।।
ज्योति से ज्योति………..
छाया है चारों ओर अंधेरा,
भटक गई हैं दिशाएँ
मानव बन बैठा है दानव,
किस को व्यथा सुनाएँ
धरती को स्वर्ग बनाते चलो….।।
ज्योति से ज्योति………………










