जो ओ३म् अजन्मा अकाय ईश्वर
जो ओ३म् अजन्मा अकाय ईश्वर,
उपास्य के वल वही हमारा ।
जो सच्चिदानन्द-स्वरूप सविता,
उपास्य के वल वही हमारा ॥
जो भू भुवः स्वः विभु विधाता,
अजर-अमर नित्य मुक्ति दाता।
पिता तथा बन्धु मित्र माता,
उपास्य के वल वही हमारा ॥
न अन्त जिसका मिला कभी है,
समाया जिसमें जगत् सभी है।
जो ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी है।
उपास्य के वल वही हमारा ॥
हिरण्यगर्भ है नाम जिसका,
है ध्यान आनन्द-धाम जिसका ।
क्रिया का फल-दान काम जिसका।
उपास्य केवल वही हमारा ॥
ले रूप जिससे है फूल खिलता,
बिना न आज्ञा के पत्ता हिलता ।
स्व आत्मा में ही है जो मिलता,
उपास्य के वल वही हमारा ॥
ऋषि मुनि सन्त जिसको ध्याय,
लगा समाधि जिसे वे पायें।
है जिसका यशगान वेद गायें,
उपास्य केवल वही हमारा ॥
जो सर्व प्रेरक है देव भर्त्ता,
अखिल जगत् का जो एक धर्त्ता ॥
जो ‘पाल’ पालक है कर्त्ता हर्त्ता,
उपास्य केवल वही हमारा ॥










