जो दुःखियों की सेवा में तन मन लगाए
जो दुःखियों की सेवा में
तन मन लगाए-
समझ लो वही आर्यवीर हो तुम।
जो ब्रह्मचर्य से अपना
बल थाम रखे,
जो पुरुषार्थ परमार्थ
से काम रखे।
जो रोशन दयानन्द का
नाम रखे-
समझलो वही आर्यवीर हो तुम।
जो बरबाद उजड़े
घरों को बसाए
जो बिछड़े हुओं को
गले से लगाए।
जो औरों को सुख देके
खुद दुःख उठाए-
समझलो वहीं आर्यवीर हो तुम।
जो अन्याय के आगे
झुकना न जाने
जो आँधी तूफान में
रुकना न जाने।
मुसीबत से डर करके
छिपना न जाने समझलो
वही आर्यवीर हो तुम।
जो मृत्यु का भय अपने
मन में न लाए-
धधकती हुई ज्वाला में कूद जाए।
चकित कर दे जग को
वह करके दिखाए समझलो
वही आर्यवीर हो तुम।
उसे करके छोड़े
जो दिल में ठनी हो,
इरादे का पक्का और
धुन का धनी हो।
धर्मरक्षा में जिसकी
छाती तनी हो-
समझलो वही आर्यवीर हो तुम।
जो मैदान में लाजपत
बनके निकले,
भगतसिंह सुखदेव दत्त
बनके निकले।
जो शेरों पे चढ़के भरत
बनके निकले समझलो
वही आर्यवीर हो तुम।










