सफल ज़िंदगी
(तर्ज- रात दिन गुरु के गीत गाए जा)
जो भी उस प्रभु के गीत गाएगा।
ज़िन्दगी सफल वही बनाएगा।
१. क्योंकि वह बड़ा है कुल जहान से।
चाँद सूर्य पृथ्वी आसमान से।
बस उसी का ध्यान जो लगाएगा।
ज़िन्दगी सफल वही बनाएगा।
२. ज़रें ज़रें में समाया जान के।
हर जगह उसे मौजूद मान के।
बदियाँ छोड़ नेकियाँ कमाएगा।
ज़िन्दगी सफल वही बनाएगा।
३. देगा जो मदद किसी ग़रीब को।
या किसी यतीम बदनसीब को।
और जो निर्बलों के काम आएगा।
ज़िन्दगी सफल वही बनाएगा।
४. फल मिलेगा पाप और धर्म का।
शुभ अशुभ किए हरेक कर्म का।
जो ‘पथिक’ यह बात जान जाएगा।
ज़िन्दगी सफल वही बनाएगा।










