जन-जन का तन मन निर्मल होगा सुन्दर (धुन-रिमझिम बरसता)
जन-जन का तन मन
निर्मल होगा सुन्दर,
सुहाना हरपल होगा।
सच्चा सपना अपना
भारत उज्वल होगा। टेक।
राजनीति का गुरू हम
चाणक्य को बनायेगें।
चाणक्य ना मिला तो
रामदास जी पै जायेंगे।।
पैरों के नीचे खल दल होगा
सुन्दर सुहाना ।।1।।
प्रीति पूर्वक सबको
धर्मात्मा बनायें गें ।।
बातों से ना मानेगा जो
लातों से मनायेगें।
ओज तेज शौर्य भुजबल
होगा सुन्दर सुहान।।2।।
सबके दुख में दुख समझेगें
सबका दुख मिटायेंगे।
सबकी उन्नति में अपनी
उन्नति हम चाहेंगे।।
प्रेमी बन्धु भूमण्डल होगा
सुन्दर सुहाना ।। 3 ।।
बहुत से लोग बस अपने
दुखों के गीत गाते हैं,
दीवाली हो या होली हो
सदा मातम मनाते हैं,
मगर दुनिया उन्हीं की
रागिनी पर झूमती हरदम
कि जो जलती चिता पर
बैठकर बीमा बजाते हैं










