जीवन की राहों में चलना सम्भल के।।

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जीवन की राहों में चलना सम्भल के।।

स्वर :- मुहब्बत की राहों में

जीवन की राहों में
चलना सम्भल के।।
फूलो में रहते हैं
काटें भी मिलके।।
उजालों के दिन हैं तो
अन्धेरों की राते कई रूप
लेते है मौसम बदल के।।१।।

इस दरिया के पत्थर
चिकने बहुत हैं,
अनेकों ही गिरते है
फिसल फिसल के।।२।।

बड़ी ही कठिन है
भलाई की मजिल
यहाँ लोग करते है
सदा ताड तिल के।।३।।

नेकी करो और कूऐ
में डालो ये वो बीज है
जो मिलते है खिल के ।।४।।

जो इरादों के पक्के
बन्दें सुरेन्द्र वो ही पास
पहुंचेंगे अपनी मंजिल के ।।५।।