जीवन एक वृक्ष है (तर्ज : मेरा जूता है जापानी )
जीवन एक वृक्ष है फानी
पत्ते बचपन शाख जवानी,
फिर है पतझड़ खुश्क बुढ़ापा
इस के बाद है खत्म कहानी
आयु जड़ को काट रहे
दिन रात के यह कुल्हाड़े,
तेरे देखते काल कुठार ने
कितने बाग उजाड़े
फिर भी मुझ को है हैरानी
मन करता है क्यों मनमानी,
तेरे काम तो हैं चोरों के
पढ़ता है संतों की बानी। जीवन
वृक्षों से कुछ सीख नसीहत
गर यह चोला पाया,
पत्तों से पत रख निर्धन की
शाखों से कर छाया।
फूलों से महके जिंदगानी
फल से फूले फले प्राणी,
जड़ से धर्म की पुखता कर दे
रह जाये याद निशानी।
सामाजिक उन्नति के चार साधन हैं-
संगठन, सत्ता, विद्या और वैभव ।










