जिसने महिमण्डल को, फिर से वेदों का सन्देश दिया।
जिसने महिमण्डल को,
फिर से वेदों का सन्देश दिया।
भ्रमित जनों को मार्ग दिखा कर,
पावनतम उपदेश दिया।
जिसके संस्थापक थे
ऋषिवर दयानन्द से विज्ञाता।
जो आगे बढ़ बना देश का प्रहरी,
गौरव उद्गाता।
मनुष्यता संपूरित जो है
सत्य अहिंसा जिसकी साज।
सत्य-शिवं सुन्दरता जिसमें,
वही हमारा आर्य समाज । ।।1।।
लेखराम श्रद्धानन्द जैसे
मिले इसे हैं बलिदानी।
भारत के इतिहास पृष्ठ पर,
अंकित गाथा लासानी।
जिसके अमर सपूतों ने है,
तोड़ा माया का बन्धन।
जिसने नष्ट किया भारत अबलाओं का,
दारुण क्रन्दन।
हर्ष। हर्ष !! है पूर्ण किया
उसने जीवन शतवर्षीय आज।
सत्य-शिवं सुन्दरता जिसमें,
वही हमारा आर्य समाज। ।2।।
भूले भारत के जनगण को,
जिसने मार्ग दिखाया है।
वैदिक संस्कृति पुरा काल की,
पुनः धरा पर लाया है।
जिसने भूमंडल भर के,
अज्ञान तिमिर को ललकारा।
बीच भँवर में फँसी मनुजता को
जिसने है उद्धारा।
ढोंगी-ठग मुल्लाओं का सब,
जिसने खोल दिया राज।
सत्य-शिवं सुन्दरता जिसमें,
वही हमारा आर्य समाज ।।3।।
आर्य समाज बढ़े उन्नति पर,
स्वर्ग बनेगी वसुन्धरा ।
कण-कण प्रमुदित होगा,
निश्चय हर्षित होगी दिव्यधरा।
बढ़ो! सपूतो !! ओ३म् ध्वजा,
सारे जग में लहराना है।
शान्ति सफलता-समृद्धि के,
संगीत हमें अब गाना है।
दृगोन्मेष कर रहीं दिशाएँ,
जाग उठा है अब गिरिराज ।
सत्य-शिवं सुन्दरता जिसमें,
वही हमारा आर्य समाज ।।4।।










