जिनके लिये हम मरे जा रहे है

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जिनके लिये हम मरे जा रहे है

जिनके लिये
हम मरे जा रहे है
वही हम से नफरत
करे जा रहे है। टेक।।

जरूरत में जिनकी हम
काम आये जख्मों पै
जिनके मरहम लगाये।
वही दूर हम से डरे जा रहे है।।1।

सारे जमाने की लेकर
बुराई जिनके लिये
हमने हस्ती मिटाई।
वही दोष हम पर
धरे जा रहें है।।2।।

रहें पास लेकिन दिलों में है
दूरी दूरी हमें दूर करनी जरूरी ।
मगर वह तो कोसो परे जा रहें हैं।3।।

अपने भले की वह सुनते नहीं हैं
सुने भी तो प्रेमी गुनते नहीं हैं।
कान कुछ ऐसे भरे जा रहे हैं।।4।

वह ईश्वरोक्त है

जिसमे सृष्टि कम प्रत्यक्षादि
प्रमाण आप्तों के और
आत्मा के व्यवहार से विरुद्ध
कथन नही वह ईश्वरोक्त है अन्य नही।