जिसे है पिपासा आओ प्रभु दर्शन की
जिसे है पिपासा,
आओ प्रभु दर्शन की,
सीधी डगरिया पकड़ो,
ईश्वर मिलन की।
किसी से ना बैर रखो,
सबसे ही प्रीति करो,
सत्य बोलो मिथ्या मत
बोल कर अनीति करो।
उदार बनो चोरी छोड़ो,
तन मनवचन की।।1।।
संयमी सदाचारी बनो
आत्मा बलवान करो
निर अभिमानी बनो
कभी ना अभिमान करो,
पांच यम योग शिक्षा
प्रथम आचरण की।।2।।
राग द्वेष त्याग भीतर बाहर
जल से पवित्र,
पूर्ण पुरूषार्थ के पश्चात
धैर्य धार मित्र,
धर्म अनुष्ठान शिक्षा
द्वन्दृ सहन की।।3।।
सत्य शास्त्रों को पढ़ो
सतपुरूषों का संग करो,
ओ३म् नाम अर्थ विचार
प्रेमी भर उमंग करो,
परमेश्वर के प्रति इच्छा
रखों समर्पण की।4।










