जिसे नाम ईश्वर का भाता नहीं है, वह आनंद जीवन का पाता नहीं है।

0
186

शिक्षा

जिसे नाम ईश्वर का भाता नहीं है,
वह आनंद जीवन का पाता नहीं है।

यह माना कि सागर में मोती भरे हैं,
जो असली हैं सच्चे हैं बिल्कुल खरे हैं।
न कुछ पा सका वह किनारे पे आके,
कदम जिसने लौटा के पीछे घरे हैं।
जो सागर में गोता लगाता नहीं है,
वह आनंद जीवन का पाता नहीं है।।1।।

आनंद वन में सब ही खड़े हैं,
अमृत के जिसमें लाखों घड़े हैं।
भटकता रहे मगर आदमी यह,
अंधेरे में कैसे दिखाई पड़े हैं।
जो भक्ति का दीपक जलाता नहीं है,
वह आनंद जीवन का पाता नहीं है।।2।।

जहाँ पर न हो कर्म के सिलसिले,
वहाँ फूल आशा के कैसे खिलें।
जो बैठा रहे आलसी ओट में,
मिले उसे मंजिल तो कैसे मिले।।3।।

‘पथिक’ पथ में जो पग बढ़ाता नहीं है,
वह आनंद जीवन का पाता नहीं है।
जिसे नाम ईश्वर का भाता नहीं है,
वह आनंद जीवन का पाता नहीं है।।4।।