जिस में दबे आत्मा वह काम बुरा है
जिस में दबे आत्मा
वह काम बुरा है।
बद है बुरा बद से
भी बदनाम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा…..
बद की संगति में
कभी पाँव न धरो,
एक पल का भी
वहां कयाम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा…..
जाम तो वही है
जो अकल निखार दे,
जो अकल बिगाड़ दे
वह जाम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा……
दिन है काम के लिए
सोने को रात है,
नींद में कटे जो
सुबह शाम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा……
ज़िन्दगी जहान में
हरकत का नाम है,
आलसी बनाये जो
आराम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा……
जिस की अक्ल और
दिमाग पराधीन हो,
राज महल में भी
वह गुलाम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा……
लाख सर धुनों हज़ार
कोशिशें करो,
पथिक बुरे काम का
अंजाम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा……
नीतिज्ञा नियतिज्ञा वेदज्ञा अपि भवन्ति शास्त्रज्ञाः ।
ब्रह्मज्ञा अपि लभ्याः स्वाज्ञान ज्ञानिनां विरलाः ॥
नीति को जानने वाले, भाग्य को
जानने वाले, वेदों में पारंगत,
शास्त्रों में निष्णांत और यहां तक
कि ब्रह्मवेत्ता भी मिल सकते हैं।
किन्तु अपनी दुर्बलताओं को
जानने वाले विरले ही होते हैं।
जिस में दबे आत्मा वह काम बुरा है
जिस में दबे आत्मा
वह काम बुरा है।
बद है बुरा बद से
भी बदनाम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा…..
बद की संगति में
कभी पाँव न धरो,
एक पल का भी
वहां कयाम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा…..
जाम तो वही है
जो अकल निखार दे,
जो अकल बिगाड़ दे
वह जाम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा……
दिन है काम के लिए
सोने को रात है,
नींद में कटे जो
सुबह शाम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा……
ज़िन्दगी जहान में
हरकत का नाम है,
आलसी बनाये जो
आराम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा……
जिस की जान और
दिमाग पराधीन हो,
राज महल में भी
वह गुलाम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा……
लाख सर धुनों हज़ार
कोशिशें करो,
पथिक बुरे काम का
अंजाम बुरा है।
जिस में दबे आत्मा……
नीतिज्ञा नियतिज्ञा वेदज्ञा अपि भवन्ति शास्त्रज्ञाः ।
ब्रह्मज्ञा अपि लभ्याः स्वाज्ञान ज्ञानिनां विरलाः ॥
नीति को जानने वाले, भाग्य को
जानने वाले, वेदों में पारंगत,
शास्त्रों में निष्णांत और यहां तक
कि ब्रह्मवेत्ता भी मिल सकते हैं।
किन्तु अपनी दुर्बलताओं को
जानने वाले विरले ही होते हैं।










