जिस घर में एक दूजे की बात जाए मानी।
जिस घर में एक दूजे
की बात जाए मानी।
उस घर में कभी ना आए
कोई भी परेशानी।
प्रयोग में ना लाओ
तराजू को शादियों में।
घर फूंक डाले कितने
विजय सौदे की शादियों ने।
समझें जहाँ बहु को ही
दहेज घर के स्वामी….।
आकाश में नहीं है
स्वर्गों की कोई दुनियां।
बेकार के भ्रम में भटकी
हुई है दुनियां।
वो ही घर है स्वर्ग जिसमें
होती है मधुर वाणी….।
माता-पिता की
सेवा ही फर्ज है हमारा।
माँ-बाप से ही जग में
नामोंनिशां हमारा।
माता-पिता की आज्ञा
जाती जहाँ पे मानी……
सन्तान पैदा करके
जो आजाद छोड़ देते।
माँ-बाप ऐसे इक दिन
सर को पकड़ के रोते।
बच्चों पे शुरू से ही
रखते जो निगरानी….।










