जिस दिल में तेरी याद नहीं
जिस दिल में तेरी याद नहीं
उस दिल का लगाना क्या होगा,
जिस गीत में तेरा नाम नहीं
उस गीत का गाना क्या होगा।
सुख दुःख के दोनो किनारों में
जीवन की नदियां बहती है।
जिस घाट पै सुख का लेश नहीं
उस घाट पै जाना क्या होगा।
दुनियां से छुपाकर पापकर्म
मैं निशिदिन करता रहता हूँ
तुझ अन्तर्यामी के आगे
पापों का छुपाना क्या होगा।
विषयों के विष के पान
कर लेता हूं नाम
मैं अमृत का मरने की
मुझको चाह नहीं
जीने का बहाना क्या होगा।
मैं झूठ को सत्य बताता हूँ
और सत्य को झूठ जताता हूँ
सत्पथ से भटके राही का
दुनिया में ठिकाना क्या होगा।
तू बिगड़ी बनाने वाला है-
बनती को बिगाड़ा है मैंने,
फिर अन्त समय की घड़ियों
में बिगड़ी को बनाना क्या होगा।
तू सबकी सुनने वाला है,
मै दर पर तेरे आ न सका,
हँसते-हँसते कुछ कह न सका
रो रो के सुनाना क्या होगा।
मैं तुझको सुख में भूल गया
दुःख में क्या मुँह लेकर आऊँ,
जो मूरख खुद को न जान सका
उसको समझाना क्या होगा
- दुनिया भी अजब
सरा-ए-फानी देखी।
हर चीज यहां की
आनी जानी देखी।
जो आके न जाए
वो बुढ़ापा देखा,
जो जाके न आए
वो जवानी देखी ।।










