जिस देश में गंगा-दर्शन से, पाप सभी धुल जाते हों।
जिस देश में गंगा-दर्शन से,
पाप सभी धुल जाते हों।
उस देश में बढ़ते अपराधों पर,
रोक लगाना मुश्किल है।।
जहां हजारों मत पन्थों की,
थोक दुकानें चलती हों।
वहां एकता के गीतों पर,
ढोल बजाना मुश्किल है।।
जहां हाथों की रेखाएं ही,
किस्मत के फैसले करती हों।
वहां कर्मशीलता पौरुष का,
पाठ पढ़ना मुश्किल है।।
जिस देश में भोला महादेव,
नेत्र तीसरा खोलता हो।
वहां सोमनाथ के मन्दिर का,
सम्मान बचाना मुश्किल है।।
जिस देश में ईश्वर ग्वाला बनकर,
गोपी के संग रास करे।
वहां चरित्र की उज्जवलता के,
दर्शन पाना मुश्किल है।।
जहां सात दिवसीय भागवत से,
‘मोक्ष द्वार’ खुल जाता हो।
वहां वेदों के अध्ययन का,
शौक जगाना मुश्किल है।।
साधारण जन बनकर ईश्वर,
जिस देश में पूजे जाते हों।
उस देश में सच्चे ईश्वर का,
स्वरूप बताना मुश्किल है।।
जिस देश में त्यागी सन्यासी,
धन के ढेरों पर सोते हों।
उस देश में भोले-भक्तों को,
सन्मार्ग दिखाना मुश्किल है।।
जिस देश की जनता निज- गौरव,
इतिहास भुलाकर बैठी हो।
दुनिया के नक्शे पर उसकी,
पहचान बनाना मुश्किल है।।










