ज़िन्दगी में पाप की ना कोई भी कमायी कर।
तर्ज – सुविधानुसार
ज़िन्दगी में पाप की ना,
कोई भी कमायी कर।
मन में जो मैल है,
उसकी सफाई कर।।
कब तक रहेगा तू,
‘सचिन’ जवान मर गया बूढ़ा होके,
वैद्य लुकमान मौत की दवाई ना,
मर्ज की दवाई कर जिन्दगी……
बात है ये सच मेरी,
कर ले यकीं धन माल छोड़ सब,
जायेगा यहीं किसी के भी साथ में,
ना कोई चतुराई कर जिन्दगी……
दुखिया गरीब रे,
सताना ना कभी दिल
को भी किसी के,
दुःखाना ना कभी
बदियों की आज ही,
दिल से विदायी कर जिन्दगी……
ऊँची-ऊँची कोठियाँ,
बनाके आलिशान देख-देख
बंगलों को, कर ना गुमान जायेगा
हवेलियों को, एक दिन पराई
कर जिन्दगी……










