ज़िन्दगी में जो भी लोग पीते हैं शराब।
तर्ज – चुप-चुप खड़े हो……
ज़िन्दगी में जो भी लोग
पीते हैं शराब।
देखना जनाब उनके हाल हैं खराब ॥
तालमेल जिन्दगी का सारा
खो दिया आदतों में “सचिन”,
सुधार ना किया देखता है
रात दिन मौत के ख़्वाब
देखना ज़नाब उनके……
लाठियों से बीवी की,
करते हैं सेवा जीती बीवी
ऐसे जैसे, जीये कोई बेवा
भूखे मरते बच्चे वो तो
बनते नवाब देखना जनाब उनके……
धर्म-कर्म कितना भी,
जानते नहीं यदि कोई समझाये,
मानते नहीं मदिरा के साथ में
वो खाते हैं कबाब
देखना ज़नाब उनके……
एक दिन बच्चे होंगे,
तेरे नौजवां बोल पड़ी बीवी
यूँ ही, समय ना गवां गालियों
से देते है ये पति जी जवाब
देखना जनाब उनके…….










