जिंदगी एक किराये का घर है

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जिंदगी एक किराये का घर है

जिंदगी एक किराये का घर है।
एक न एक दिन बदलना पड़ेगा।
मौत जब भी आवाज देगी,
घर से बाहर निकलना पड़ेगा।।

  1. ढेर मिट्टी का हर आदमी है,
    बाद मरने के होना यही है।
    या तो उसकी कुर्बत बनेगी
    या चिताओं में जलना पड़ेगा।।

2.रात के बाद होगा सवेरा,
देखना हो अगर दिन सुनहरा-२
पाँव फूलो पे रखने से पहले-२
तुझको कांटो पे चलना पड़ेगा-२
जिंदगी एक किराये का घर है…

३.ये तसउवर ये जोस और जवानी,
चंद लम्हों की है कहानी-२
ये जवानी अगर ढल गयी तो-२
उम्र भर हाथ मलना पड़ेगा-२
जिंदगी एक किराये का घर है.”