जिन वीरों ने देश धर्म पर की लाखों कुर्बानियां। (धुन-हमने गांव के पनघट पै)
जिन वीरों ने देश धर्म पर
की लाखों कुर्बानियां।
उन वीरों की आज भुलाई
जा रही अमर कहांनियाँ। टेक।
वे दीवाने थे वे, मस्ताने थे,
वे परवाने थे, वे मरदाने थे।
सूरत से सादे भोले थे
दिल में अग्नि के शोले थे।।
नही अपने पथ से डोले थे
रिपु के लिए बम के गोले थे।
जिनके नाम और काम से
कम्पित हो भागे बरतानियाँ । ।1।।
वह कैसे थे जैसे थे वह ऐसे थे
नहीं भय से थे।
वह लड़े मौत से बेखटके
कुछ देश विदेशों में भटके ।।
कुछ फांसी के ऊपर लटके
कुछ संगीने आगे डटके।
आजादी की भेट चढ़ा गये,
उठती हुई जवानियाँ । ।2।।
है काम उनका, और नाम इनका,
प्रोग्राम उनका, परिणाम इनका।
यह कितनी बड़ी है कृतघ्नता
जब तक नही समझेगी जनता।
इन धूर्तों का कुछ नही बनता।।
देश भक्त जनता की निशदिन
बढ़ती जो परेशानियाँ।।3।।
जिसकी खातिर, दिये अनगिन सिर,
गर्दिश में घिर, वह बुलाये फिर।
ऐ भारत माता के लालो,
गिरती हालत को सम्भालो ।।
इन अबसरवादीं नक्कालो का
जो करना सो कर डालो।
देश भक्त वीरों की प्रेमी जग
में अमिट निशानियाँ । ।4।।










