झर झर के मेघ बरसे

0
26

झर झर के मेघ बरसे

झर झर के मेघ बरसे
रिस-रिस के झरने बह रहे
नदियों में धरा धारों में
वृक्षों की जड़-डालों में
तालाब कुएँ नहरों में
गिरी जङ्गल मैदानों में


जहाँ देखें नजरें वहाँ
बेताबियाँ करती बयाँ
महिमा प्रभु की अद्भुत
रह रह के हम निहार रहे
झर झर के मेघ बरसे
रिस-रिस के झरने बह रहे

छोटी-छोटी धाराएँ
बन गई विशाल नदियाँ
वाह दाता !
वाह दाता !
विस्तीर्ण जल-राशि पे
टिकी हैं वरुण की अखियाँ


वाह दाता !
वाह दाता !
उमड़ी हरियाली भी
पशुओं को चारा मिला
जन-जन को वर्षा के
जल का सहारा मिला


प्यासों की प्यास बुझाता यह जल
नदियों ने सागर का थामा आँचल
वरणीय वरद वरुण के वारिद बरस रहे
झर झर के मेघ बरसे
रिस-रिस के झरने बह रहे

इन अश्वों को देखो
कितना धारण करते बल
बल न्यारा!
बल न्यारा!
घास खाते हैं साधारण
पीते हैं साधारण जल
बल न्यारा !
बल न्यारा !


इन गौओं को तो देखो
दूध देती शक्तिदायक
गौएँ दुधारी करने
आता है वरुण विधायक
वे भी साधारण ही
खाती हैं घास
साधारण जल पीती हैं


करती हैं प्रवास
दूध थनों से सुधा सम बहे
झर झर के मेघ बरसे
रिस-रिस के झरने बह रहे
नदियों में धरा धारों में
वृक्षों की जड़-डालों में
तालाब कुएँ नहरों में
गिरी जङ्गल मैदानों में


जहाँ देखें नजरें वहाँ
बेताबियाँ करती बयाँ
महिमा प्रभु की अद्भुत
रह रह के हम निहार रहे
झर झर के मेघ बरसे
रिस-रिस के झरने बह रहे