जीये जा रहे हैं जीये जा रहे हैं।
जीये जा रहे हैं जीये जा रहे हैं।
सफर को खत्म हम,
किये जा रहे हैं।
मुबारक उन्हीं का है
जीना जहां में।
खिले फूल बनकर
जो इस गुलिस्तां में।
महक अपनी जग को
दिये जा रहे हैं।
क्यों जी रहे हैं खबर ही नहीं है।
इरादों पे अपने नजर ही नहीं है।
सांस आ रहे हैं लिए जा रहे हैं….।
कहां जा रहे हैं कहां है ठिकाना।
कभी हमने सोचा न समझा न जाना।
जो है दिल में आया, किये जा रहे हैं।
सुबह-शाम ख्वाहिश
के चक्कर में फंसकर।
बेगाने गुनाहों के दलदल में फंसकर।
नफरत के प्याले पीये जा रहे हैं।
फटे दिल मुहब्बत के धागों से सीकर।
हुए वीर अमर आंसू
दुखियों के पीकर।
जो गम लेके खुशियां
दिये जा रहे हैं।










