जीवन ये अरे तूनें,विषयों में गुज़ारा है।
जीवन ये अरे तूनें,
विषयों में गुज़ारा है।
होती है शबाहत क्या,
ना इतना विचारा है।
ये तेरी जवानी तो,
एक रवां सरापा है।
ना बना है नासेहा,
ना दिल निखारा है।
ना पायेगा तस्कीन,
अब संभल-2 के चल।
रस्ते में ख़लिश बिखरे,
तूने जो निहारा है।
एक दिन तो जमाने से,
रूखसत भी होना है।
पर यूँ ना गवाँ देना,
जीवन ये प्यारा है।
गोदी में ले लेगी, वो क़ज़ा
“सचिन” सबको ।
बस उसके सामने तो,
हर शख़्स ही हारा है।










