जीवन है ये क्या जीवन, जिसमें न रवानी है।
जीवन है ये क्या जीवन,
जिसमें न रवानी है।
जिन्दगी और कुछ भी नहीं,
दो दिन की कहानी है।।
करे प्यार जो हर दिल से,
डूबों को किनारा दे।
गिरतों को उठा ऊपर,
बाहों का सहारा दे।।
उपकार के जीवन की,
यही श्रेष्ठ कहानी है।
जीवन है ये क्या जीवन, जिसमें न ………
कांटा जो किसी को लगे,
चलना पग रुक जाए।
सी सीने से निकले तेरी,
और उसके तू काम आए।
इंसा ही नहीं वो जिसकी,
आँखों में न पानी है।।
जीवन है ये क्या जीवन, जिसमें न………
यश कुछ भी कमा न सका,
प्रभु के भी न गुण गाए।
वो जीना भी क्या जीना,
जो किसी न काम आए।।
जीते जी जीने की,
कुछ सार न जानी है।
जीवन है ये क्या जीवन,
जिसमें न खुद खाया तो क्या खाया,
औरों को खिला न सका।
दो घूँट पानी की,
प्यासे को पिला न सका।।
‘पथिक’ तेरी इस जग को,
फिर याद क्यों आनी है।।
जीवन है ये क्या जीवन, जिसमें न……










