जीने से तेरे कोई सुख ना हुआ
जीने से तेरे कोई सुख ना हुआ,
मरने से तेरे कोई दुःख ना हुआ।
यह क्या जिन्दगानी है,
तेरी नौजवां सुन यह
कहानी है तेरी नौजवां।
कदम-कदम पे तेरे धरती में
लरज होती थी।
हुंकार तेरी नभ में घन
जैसी गरज होती थी।
ना वह चमक ना वह दमक
कहां जोशे जवानी है। तेरी….।।१۱۱
हंसना तेरा था ऐसा जैसे
फूलों की होती हो वर्षा।
क्रूद्ध होना तेरा जग में कर
देता था कहर बरपा।
बात जो कभी तूने कही
वो दुनियां ने मानी है। तेरी…।।२।।
तेरी नजर से नजरे नहीं कोई
मिला सकता था।
तेरा कदम जहां में नहीं कोई
हिला सकता था।
निर्जीवों को जीवन दिया,
कहाँ वह रवानी है तेरी….।।३।।
तेरे ही घर के अन्दर आज
होती है तेरी पिटाई।
‘प्रेमी’ तू राग गाये आज
गैरत को भी गैरत आई।
जीवन तबाह खुद ही किया
यह बड़ी नादानी है। तेरी…।।४।।










