जीने का भी साहस करो
जीने का भी साहस करो,
मृत्यु का भी ध्यान करो,
धनी बनो आप धन को,
शुभ कर्मों में दान करों।। टेक ।।
जीने दो और जीओं,
का सिद्धान्त क्यों उल्टा करते हो,
अपना पेट भरने के लिये
औरों के गले कतरते हो,
वसुधैव कुटुम्बकम् का
कुछ तो सन्मान करो।।1।।
आप तो शालों में लिपटे
महलों में आनन्द करते हैं,
उन्हें भी देखो सड़कों पर
जो नंगे बदन ठिठुरते हैं,
निर्धन दुखियारों का दुख से
परित्राण करो।।2।।
सड़ी हुई नाली के अन्दर
रोटी आप बहाते हैं,
उधर वह देखो बिन
रोटी के भूखे जन चिल्लाते हैं,
गर्दिश के मारों की
मुश्किल आसान करो।।3।।
इस दुनिया के मेले में है
अपना और पराया कौन,
कौन यहां से ले जाता है
और यहां कुछ लाया कौन,
शुभ अशुभ कर्म की तुम
प्रेमी पहचान करों ।।4।।










