जायेगा जब यहाँ से, कुछ भी न पास होगा।

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जायेगा जब यहाँ से,कुछ भी न पास होगा।

जायेगा जब यहाँ से,
कुछ भी न पास होगा।
दो गज कफन का टुकड़ा,
तेरा लिबास होगा।।

काँधे पे धर ले जायें,
परिवार वाले तेरे।
यमदूत ले पकड़कर,
डोलेंगे घेरे-घेरे।
पीटेगा छाती अपनी,
कुनबा उदास होगा।।
दो गज कफन का टुकड़ा, तेरा…….

चुन-चुन के लकड़ियों में,
रख दें तेरे बदन को।
आकर के झट उठा लें,
मेहतर तेरे कफन को।
दे देगा आग तुझमें,
बेटा जो खास होगा।।
दो गज कफन का टुकड़ा, तेरा…….

मिट्टी में मिले मिट्टी,
बाकी खाक होगी।
सोने सी तेरी काया,
जलकर के खाक होगी।
दुनिया को त्याग तेरा,
मरघट निवास होगा।।
दो गज कफन का टुकड़ा, तेरा…….

हरि का जो नाम जपते,
भव सिन्धु पार होते।
माया मोह में फंसकर,
जीवन अमोल खोते।
प्रभु का नाम जप ले,
बेड़ा जो पार होगा।।
दो गज कफन का टुकड़ा, तेरा…….