जवानों तुम्हें पग बढ़ाना पड़ेगा

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जवानों तुम्हें पग बढ़ाना पड़ेगा

जवानों तुम्हें पग बढ़ाना पड़ेगा,
जो कह रहे हो करके
अब दिखाना पड़ेगा।
मेहनतकश निर्धन के बच्चे
दिन और रात कमाते हैं
तन से नंगे आंसू पीकर
पेट बांध सो जाते हैं
तन ढकने को बिस्तर नहीं
सिर छिपाने को छप्पर नहीं है
पृथ्वी का बिस्तर आकाश की छत क्या
यह सितम आज उन पर नहीं है?
मारे-मारे फिरें बेचारे गर्मी सर्दी बरसात में।।1।।

धनी निठल्ले और निकम्मे
भ्रष्टाचार फैलाते हैं
अपनी स्वार्थ सिद्धि पर
निर्धन की भेंट चढ़ाते हैं
विलासिता के पुतले,
नाश की निशानी
गरीबों के दुश्मन बड़े अभिमानी
देश धर्म का नहीं प्यार इनको
जुल्मों से भरपूर इनकी कहानी
फिर भी सारी सुख समृद्धि
आज इन्हीं के हाथ में।।2।।

आज श्रमिक के पेट को
रोटी तन को बिस्तर देना
है शिक्षा चिकित्सा न्याय
धर्म में अच्छा स्तर देना
है रहने को घर देना करने को धन्धा
उठा लो वजन करके मजबूत कन्धा
गरीबों अनाथों के रक्षक तुम्हीं हो
तुम्हारे बिना देश भारत है अन्धा
भ्रष्टाचार चार विषमता खोकर
चलो सभी एक साथ में ।।3।।

सावधान ए जवान तेरी
धरती कभी रिपुन हड़प जायें
कभी धर्म संस्कृति सभ्यता
गऊ की नस्लें खप जायें
कभी लुट न जायें तेरे
लाल ललना प्रहरी है,
तू सावधान हो के चलना
भयंकर समय और मार्ग विकट है
बड़ा ही कठिन आज गिर के
संभलना प्रेमी आज विधर्मी
शत्रु लगे तुम्हारी घात में।।4।।