जवानी गई तो प्रभु याद आया।

0
73

प्रभु याद आया (तर्ज जसुमति मैय्या से)

जवानी गई तो प्रभु याद आया।
कीमती समय क्यों व्यर्थ गंवाया।।

स्वस्थ शरीर से ही सब काम होते,
रोगी मनुज कहीं, योगी न होते।

भोगी नरों ने कभी,
सुख नहीं पाया।
दुःख ही उठाया।।१।।

जवानी सूखी फसल
तब बरसा है पानी।
मारेगा निशाना कैसे,
टूटी है कमानी।।

आग लगी तब,
कूप बनाया।
घर को जलाया।।२।। जवानी……

गाड़ी गई तब, चला है मुसाफिर।
मिली ना निकट आया,
घर आखिर ।।
बहुत पछताया ।।३।। जवानी…….

जो कौम गाती नहीं,
वह मिट जाती है।।