जपो ओम् नाम प्राणों का प्राण है।

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जपो ओम् नाम

(तर्ज – चलो चलें माँ सपनों के गाओं में)

जपो ओम् नाम प्राणों का प्राण है।
दुःखों को दूर करे सुखों की खान है।
जपो ओम् नाम……..

१. ओम् की दया का जवाब नहीं।
मेहरबानियों का हिसाब नहीं।
हर किसी ज़बान पर एक ही बयान है।
जपो ओम् नाम……

२. हर दिलोदिमाग़ में उसी का वास है।
दीखता नहीं मगर सभी के पास है।
ओम् की उपासना ज़िन्दगी की शान है।
जपो ओम् नाम………

३. विश्व में विशाल से विशाल है वही।
लाजवाब है बेमिसाल है वही ।
सर्वशक्तिमान् आसमान के समान है।
जपो ओम् नाम……..

४. चर्म चक्षुओं से वो सदा ही दूर है।
ज्ञान चक्षुओं से दीखता ज़रूर है।
आत्मा की आत्मा मानता जहान है।
जपो ओम् नाम………

५. नाम हैं अनेक मुख्य नाम ओम् है।
ओम् नाम से पवित्र रोम रोम है।
ओम् नाम का इनाम स्वर्ग से महान् है।
जपो ओम् नाम………

६. ओम् ओम् ओम् नित्य बोलते रहो।
रोम रोम में मिठास घोलते रहो।
‘पथिक’ ओम् नाम जपो वेद का विधान है।
जपो ओम् नाम…….