जप ले ओ३म् नाम
जप ले ओ३म् नाम,
भोग जिन्दगी को हंस कर,
वैराग अभ्यास द्वारा,
इन्द्रियों को वश कर ।।
समय बड़ा कीमती है,
जिन्दगी का एक पल,
व्यर्थ न निकल जाये,
सावधान होकर चल।
बुराइयों की दल दल में,
रो रहा क्यों धंस कर ।।1||
प्राण ही सशक्ते सारी
जिन्दगी का खेल है,
विषय वासना की,
प्राणायाम ही नकेल है।
आत्मा से मेल है मन की
लगाम कस कर ।। 2 ।।
वाणी कर सदुउपयोग,
यह है बड़ी अनमोल,
मृदु सत्य बोल,
इससे किसी का हृदय न छोल।
रसना है रस घोल,
रसना में रस कर।। 3।।
चक्षुओं से भद्र देख,
श्रोतों से भद्र सुन,
सुना और जो देखा,
उसे विवेकी बुद्धि से चुन।
शोभाराम ‘प्रेमी’ सद्गुण
कीर्ति व यश कर ।। 4।।










