जन्म से नहीं मनुष्य कर्म से महान है।
जन्म से नहीं मनुष्य कर्म से महान है।
अन्यथा तो पशु-पक्षियों के समान है।
जन्म से नहीं मनुष्य कर्म से…….
नींद, खान-पान,
विषय-वासना की दौड़ में,
आदमी व जानवर की
एक-सी उड़ान है,
जन्म से नहीं मनुष्य कर्म से……
धर्म, कर्म, दान, पुण्य,
सभ्यता, उदारता,
इन गुणों से आदमी की
जान व पहचान है।
जन्म से नहीं मनुष्य कर्म से…….
बेमिसाल बुद्धि रूप रत्न प्रभु ने दिया,
जिसकी चमक सूझ-बूझ, तर्क और ज्ञान है।
जन्म से नहीं मनुष्य कर्म से……..
एकमात्र यह मनुष्य जन्म,
ही विशेष है।
जिसमें मिले हाथ, हँसी,
भाषा का वरदान है।
जन्म से नहीं मनुष्य कर्म से ……
हैं अनन्त योनियाँ,
विशाल विश्वलोक में,
सर्वश्रेष्ठ योनि,
इस मनुष्य को प्रदान है।
जन्म से नहीं मनुष्य कर्म से…..
कर भविष्य के लिए,
प्रबन्ध तू निवास का,
‘पथिक’ यह मकान तो,
सराय का मकान है।
जन्म से नहीं मनुष्य कर्म से……










